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सकारात्मक नैदानिक परिणामों के साथ यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर का इलाज किया जा सकता है। कैंसर चिकित्सा के क्षेत्र में हुई प्रगति के कारण, अब हम उत्कृष्ट परिणामों के साथ उन्नत चरण के यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर का भी इलाज कर सकते हैं।
जब यूरेथ्रा (मूत्रमार्ग) (वह ट्यूब जिसके माध्यम से मूत्र को शरीर से बाहर निकाला जाता है) में मौजूद सेल्स (कोशिकाएं) असामान्य रूप से विभाजित होने लगती हैं तब यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग का) कैंसर होता है । यह दुर्लभ यूरोलॉजिकल कैंसर में से एक है, और यह पुरुषों और महिलाओं दोनों में देखा जाता है। हालांकि, अध्ययनों में पाया गया है कि कुछ प्रकार के यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर महिलाओं में अधिक प्रचलित हैं।
एजिस सेल (कोशिका) से वे उत्पन्न होते हैं उसके प्रकार के आधार पर, यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर को निम्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है :
यह यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर का एक सामान्य प्रकार है। महिलाओं में, यह ब्लैडर (मूत्राशय) के करीब मूत्रमार्ग की सेल्स (कोशिकाओं) में शुरू होता है, और पुरुषों में, यह पेनिस (लिंग) के मूत्रमार्ग की परत में शुरू होता है।
इस प्रकार का मूत्रमार्ग कैंसर मूत्रमार्ग के आसपास मौजूद ग्रंथियों में शुरू होता है।
पुरुषों में, इस प्रकार का कैंसर मूत्रमार्ग की सेल्स (कोशिकाओं) में शुरू होता है जो मूत्रमार्ग के ओपनिंग के पास मौजूद होती हैं। दूसरी ओर, महिलाओं में, इस प्रकार का कैंसर मूत्रमार्ग के उस हिस्से में शुरू होता है जो प्रोस्टेट ग्रंथि से घिरा होता है। आमतौर पर, यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर का पता उन्नत चरणों में चलता है जब उन्हें बहुत जटिल उपचार योजना की आवश्यकता होती है।
वजाइन (योनि) मेलेनोमा, मेलेनोसाइट्स जो वजाइन (योनि) की दीवार में वर्णक - उत्पादक सेल्स (कोशिकाएं) होती हैं उन सेल्स (कोशिकाओं) से उत्पन्न होता है। वजाइन (योनि) सरकोमा की तरह ही कैंसर का यह प्रकार भी दुर्लभ होता है।
प्रारंभिक अवस्था में यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर का कोई लक्षण नहीं होता है। हालांकि, जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, मरीज़ को पेशाब करने में कठिनाई हो सकती है और ब्लैडर (मूत्राशय) पर नियंत्रण खो सकता है। रात के समय बार-बार पेशाब आना भी यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर का संकेत हो सकता है। यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर के अन्य प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं :
हालांकि यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर का सटीक कारण ज्ञात नहीं है, लेकीन शोधकर्ताओं ने कुछ जोखिम कारकों की पहचान की है। ये जोखिम कारक यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर के विकास की संभावना को बढ़ा सकते हैं।
उम्र के साथ यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग का) कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।
विभिन्न प्रकार के मूत्र मार्ग के संक्रमणों के कारण होने वाला दीर्घकालिक या लंबे समय तक सूजन या जलन से यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग का) कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता है।
कुछ यौन संचारित रोग यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसरके विकास का जोखिम बढ़ने का कारण बनते हैं। उदाहरण के लिए, ह्युमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) की एक विशिष्ट नस्ल से जुड़े दीर्घकालिक संक्रमण से यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
जिन लोगों ने अतीत में ब्लैडर (मूत्राशय के) कैंसर का इलाज कराया है, उन्हें भी यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग का) कैंसर होने का खतरा अधिक होता है।
अफ्रीकी-अमेरिकी नस्ल की आबादी के बीच यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर की घटनाएं तुलनात्मक रुप से अधिक होती हैं।
यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर का पता लगाने और निदान करने के लिए विभिन्न परीक्षण विधियाँ उपलब्ध हैं।:
जब कोई मरीज़ यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर के लक्षणों के साथ डॉक्टर के पास आता है, तो डॉक्टर मरीज़ की मेडिकल हिस्ट्री (चिकित्सा इतिहास) का आकलन करता है, जिसमें मरीज़ की स्वास्थ्य आदतों, पिछली चिकित्सा स्थितियों और मरीज़ द्वारा प्राप्त किए गए उपचारों, एलर्जी आदि के बारें में समझना शामिल होता है। शारीरिक जांच के दौरान, डॉक्टर मरीज़ की बीमारी के शारीरिक लक्षणों, जैसे गांठ, घाव, सूजन और दर्द के लिए शारीरिक परीक्षण करता है। शारीरिक परीक्षण में एक डिजिटल रेक्टल (मलाशय) परीक्षण और पेल्विक (श्रोणि) परीक्षण शामिल हो सकता है, जहां यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर के संकेतों के लिए पूरे पेल्विक (श्रोणि) क्षेत्र की जाँच की जाती है।
यदि यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर का संदेह होता है, तो डॉक्टर किसी भी असामान्यताओं को देखने के लिए मूत्र परीक्षण की सलाह दे सकते हैं। मूत्र के नमूने का साइटोलोजी अनालिसिस (कोशिका विज्ञान विश्लेषण) भी असामान्य सेल्स (कोशिकाओं) की उपस्थिति का पता लगाने में मदद कर सकता है। मरीज़ की कुल स्वास्थ्य की स्थिति को समझने के लिए डॉक्टर रक्त परीक्षण की भी सिफारिश कर सकते हैं।
इस प्रक्रिया में कैंसर के संकेतों के लिए मूत्रमार्ग और मूत्राशय की आंतरिक परत की जांच करने के लिए मूत्रमार्ग में प्रकाश स्त्रोत के साथ एक पतली, ट्यूब डाली जाती है। डॉक्टर इस प्रक्रिया के दौरान बायोप्सी का नमूना इकठ्ठा करने पर भी विचार कर सकते हैं।
बायोप्सी के दौरान, संदिग्ध क्षेत्र से ऊतकों का एक छोटा सा नमूना इकठ्ठा किया जाता है। कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) की उपस्थिति के लिए इस नमूने की आगे माइक्रोस्कोप के तहत जांच की जाती है। यह परीक्षण रोग का निश्चित निदान प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर का सटीक निदान करने के लिए और कैंसर का चरण निर्धारित करने के लिए, डॉक्टर सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन और अन्य इमेजिंग परीक्षणों की सिफारिश कर सकते हैं। ये परीक्षण ट्यूमर की विस्तृत संरचना के साथ-साथ ट्यूमर का आकार, ट्यूमर का सटीक स्थान, इसका आकार, इसकी अवस्था आदि जैसी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं। अक्सर उपचार के दौरान उपचार के प्रति मरीज़ की प्रतिक्रिया निर्धारित करने के लिए इन इमेजिंग परीक्षणों की सिफारिश की जा सकती है।
यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर के सफल प्रबंधन के लिए कई उपचार विकल्प उपलब्ध हैं। रोग के चरण, उसके ग्रेड, उसके प्रकार, मरीज़ की उम्र और उसकी कुल स्वास्थ्य स्थिति जैसे विभिन्न कारकों के आधार पर उपचार की योजना बनाई जाती है।
रोग की गंभीरता के आधार पर उपचार योजना में या तो एक उपचार विकल्प या दो या अधिक उपचार विकल्पों का संयोजन हो सकता है।
यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर के लिए आमतौर पर सिफारिश किए जाने वाले उपचार के तरीकों में सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) शामिल हैं।
धीमी गति से बढ़ने वाले यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर के मामले में, डॉक्टर सक्रिय निगरानी की सिफारिश कर सकते हैं, इस उपचार विधि में तत्काल उपचार नहीं दिया जाता है, लेकिन नियमित परीक्षणों के साथ ट्यूमर की लगातार निगरानी की जाती है। बीमारी के लक्षण दिखने के बाद उपचार की सिफारिश की जा सकती है।
यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर के लिए सर्जरी उपचार की मुख्य पंक्ति है, और रोग के चरण के आधार पर निम्नलिखित में से एक या अधिक सर्जिकल प्रक्रियाओं की सिफारिश की जा सकती है
यह प्रक्रिया ट्यूमर के आसपास के स्वस्थ ऊतकों के एक छोटे हिस्से जिसे मार्जिन कहा जाता है उसके साथ ट्यूमर को निकाल देती है।
इस प्रक्रिया के दौरान, कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को जलाने के लिए एक विशेष उपकरण के माध्यम से विद्युत प्रवाह के स्पंदन भेजे जाते हैं।
लेजर सर्जरी के दौरान, कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने के लिए हाई – एनर्जी (उच्च-ऊर्जा) लेजर बीम (प्रकाश की संकीर्ण और तीव्र बीम) का उपयोग किया जाता है।
इस सर्जिकल प्रक्रिया में ग्रोइन (पेट और जांध के बीच का भाग) और पेल्विक (श्रोणि) क्षेत्र में मौजूद लिम्फ नोड्स को निकालना शामिल है।
वजाइनल (योनि के) कैंसर के कुछ मामलों का इलाज लेजर सर्जरी से किया जा सकता है। इस प्रक्रिया के दौरान, ट्यूमर को एक लेजर बीम (जो तीव्र-ऊर्जा, सिंगल वेवलेंथ लाईट का एक संकीर्ण बीम होता है) का उपयोग करके नष्ट कर दिया जाता है जो ट्यूमर की ओर निर्देशित होता है। यह एक नॉन - इनवेसिव (बिना चिरफाड वाली) प्रक्रिया होती है और इस प्रक्रिया में उपचार संबंधी जटिलताएं कम होती है।
यह प्रक्रिया ब्लैडर (मूत्राशय) के साथ यूरेथ्रा (मूत्रमार्ग) को हटाने के लिए की जाती है।
इस सर्जिकल प्रक्रिया में ब्लैडर (मूत्राशय), पेरीवेसिकल फैट, पेरिटोनियल कवरिंग, प्रोस्टेट ग्लैंड (पौरुष ग्रंथि), वासा डिफेरेंटिया और सेमिनल वेसिकल्स को निकालना शामिल होता है। कई बार, इस प्रक्रिया के दौरान पूरा यूरेथ्रा (मूत्रमार्ग) भी निकाला जा सकता है।
इस प्रक्रिया की सिफारिश उन महिलाओं के लिए की जाती है जिनमें यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर का निदान किया गया है जो आक्रामक है और पास के लिम्फ नोड्स में फैल गया है। यह सर्जिकल प्रक्रिया यूरेथ्रा (मूत्रमार्ग), ब्लैडर (मूत्राशय), वजाइन (योनि), सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा), यूटरस (गर्भाशय) और मूत्रवाहिनी के निचले हिस्से को निकाल देती है। इस प्रक्रिया के बाद वजाइन रिकन्स्ट्रक्शन (योनि का पुनर्निर्माण) किया जा सकता है।
पुरुष यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर के मरीज़ों में, डॉक्टर पेनिस (लिंग) के एक हिस्से (पार्शल पेनेक्टॉमी) या पूरे पेनिस (लिंग) (रेडिकल पेनेक्टॉमी) को निकालने की सिफारिश कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के बाद पेनिस रिकन्स्ट्रक्शन (लिंग का पुनर्निर्माण) किया जा सकता है।यदि यूरेथ्रा (मूत्रमार्ग) और ब्लैडर (मूत्राशय) को निकाल दिया जाता है, तो मूत्र का संचय करने और उसे पास करने के लिए निम्नलिखित सर्जिकल प्रक्रियाओं की सिफारिश की जा सकती है :
यूरेथ्रा (मूत्रमार्ग) को निकाल दिए जाने के बाद मूत्र को शरीर से बाहर निकलने के लिए इस प्रक्रिया से एक नया रास्ता बनाया जाता है।
इस प्रक्रिया के दौरान, छोटी आंत के एक छोटे से हिस्से का उपयोग मूत्र को संग्रहीत करने और बाहर निकालने के लिए एक बाहरी मूत्र संग्रह बैग के साथ एक नया मार्ग बनाने के लिए किया जाता है।
जब ब्लैडर (मूत्राशय) को पूरी तरह से निकाल दिया जाता है तब यह प्रक्रिया की जाती है । ब्लैडर (मूत्राशय) को छोटी आंत से बने स्टोरेज पाउच से बदल दिया जाता है, जिसे एक ओपनिंग के जरिए खाली किया जाता है।
: रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने के लिए तीव्र ऊर्जा एक्स-रे और अन्य प्रकार के रेडिएशन बीम (विकिरण किरणों) का उपयोग करती है। रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर के लिए सिफारिश किए जाने वाले सामान्य उपचार विकल्पों में से एक है। यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर के लिए रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) दो तरह से दी जा सकती है - बाहरी (एक्स्टर्नल) और आंतरिक (इंटर्नल)। एक्स्टर्नल बीम रेडिएशन थेरेपी (बाहरी किरण विकिरण चिकित्सा) के दौरान, रेडिएशन बीम (विकिरण किरणों) को बाहरी स्रोत के माध्यम से वितरित किया जाता है। इंटर्नल रेडिएशन थेरेपी (आंतरिक विकिरण चिकित्सा) के दौरान, रेडिएशन (विकिरण) स्रोत शरीर के अंदर रखा जाता है - या तो ट्यूमर के बहुत करीब या ट्यूमर के अंदर रखा जाता है। उपचार की कुल प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) का उपयोग अन्य उपचार दृष्टिकोणों के संयोजन में किया जा सकता है।
सर्जरी से पहले ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए कीमोथेरेपी दी जा सकती है इसे नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी कहते है या सर्जरी के बाद बची हुई कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने के लिए कीमोथेरेपी दी जा सकती है इसे एडजुवेंट कीमोथेरेपी कहते है । कीमोथेरेपी को मौखिक रूप से, नसों के माध्यम से (इंट्रावेनस्ली) या मांसपेशियों के माध्यम से (इंट्रामस्क्युलर) प्रशासित किया जा सकता है। एक सिस्टमिक थेरेपी (प्रणालीगत चिकित्सा) के रूप में, कीमोथेरेपी पूरे शरीर में कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट कर देती है। मरीज़ के उपचार की प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने के लिए इसे अन्य उपचार दृष्टिकोणों के संयोजन में प्रशासित किया जा सकता है।
सकारात्मक नैदानिक परिणामों के साथ यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर का इलाज किया जा सकता है। कैंसर की चिकित्सा के क्षेत्र में हुई प्रगति अब विशेषज्ञों को बेहतर उत्तरजीविता दर के साथ उन्नत चरण के यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर का इलाज करने की अनुमति दे रही है।
हालाँकि, प्रारंभिक निदान बहुत सी चीजों को बदल देता है। कैंसर कोई भी हो, इसका सफलतापूर्वक इलाज करने के लिए शुरुआती चरणों में इसका पता लगाने की जरूरत है। लक्षणों पर नजर रखना और दो सप्ताह से अधिक समय तक कोई भी लक्षण रहने पर डॉक्टर से परामर्श करना सबसे महत्वपूर्ण है।
हां, आमतौर पर यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग का) कैंसर तेजी से फैल सकता है। अधिकांश मामलों में, निदान के समय तक, यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग का) कैंसर पास के लिम्फ नोड्स में फैल गया होता है।
हालांकि, कुछ यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर धीमी गति से बढ़ सकते हैं, और यह ट्यूमर के ग्रेड पर निर्भर करता है। ट्यूमर का ग्रेड और उचित उपचार के बारे में अधिक जानकारी के लिए, मरीज़ों को अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
कुछ मामलों में, यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग का) कैंसर वापस आ सकता हैं। हालांकि, अगर यूरेथ्रल (मूत्रमार्ग के) कैंसर का जल्दी पता चल जाए, तो इसका सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। रिलैप्स (पुनरावर्तन) के जोखिम को कम करने के लिए, मरीजों को अपनी फॉलो-अप अपॉइंटमेंट (अनुवर्ती नियुक्तियों) का सख्ती से पालन करना चाहिए। यह न केवल पुनरावृत्ति के जोखिम को कम करने में मदद करता है बल्कि पुनरावृत्ति को उनके प्रारंभिक चरण में पकड़ने में भी मदद करता है।
क्योंकी यह एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है, शोधकर्ता अभी भी इस कैंसर के जोखिम को कम करने के सर्वोत्तम संभव तरीकों का पता लगा रहे हैं।
हालांकि कोई निवारक उपाय नहीं हैं जो पूरी तरह से वजाइनल (योनि के) कैंसर को रोक सकते हैं, लेकीन कुछ उपाय हैं जो आप इस बीमारी के विकास के अपने जोखिम को कम करने के लिए कर सकते हैं :